चना पोषण एवं उर्वरक
चना की अच्छी पैदावार के लिए पोषक तत्वों की आवश्यकता, उर्वरक की मात्रा तथा जिंक की कमी होने पर अपनाये जाने वाले उपाय।
चना में पोषण एवं उर्वरक प्रबंधन
सिंचित एवं बारानी क्षेत्रों में चना फसल के लिए उर्वरक प्रबंधन तथा जिंक की कमी के सुधार की जानकारी।
खाद व उर्वरक
चना में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए अनुशंसित मात्रा
चना में खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
सिंचित और बारानी क्षेत्रों के लिए
सिंचित क्षेत्रों में नत्रजन एवं फॉस्फोरस
चना की सिंचित क्षेत्रों में अच्छी पैदावार के लिये नत्रजन 5 किग्रा. तथा फॉस्फोरस 10 किग्रा. प्रति बीघा की दर से बीज बोने से पहले ड्रिल करें।
बारानी क्षेत्रों में उर्वरक
बारानी क्षेत्रों में उपरोक्त उर्वरक की आधी मात्रा बुवाई से पहले ड्रिल करें।
एन.पी.के. घोल का छिड़काव
बारानी क्षेत्रों में एन.पी.के. विलयन (19:19:19) के 1 प्रतिशत घोल का फूल आने की अवस्था पर छिड़काव करने से चने की उपज में वृद्धि होती है।
फॉस्फोरस की पूर्ति
चने में फॉस्फोरस सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक द्वारा देना लाभदायक पाया गया है। यदि फॉस्फोरस डी.ए.पी. उर्वरक से देना है तो सल्फर की पूर्ति के लिये जिप्सम 220 किग्रा. प्रति हेक्टेयर भी प्रयोग में लें।
जिंक का पर्णीय छिड़काव
मृदा परीक्षण एवं जिंक की कमी के आधार पर
जिंक की कमी की पहचान एवं उपचार
जिंक की उपलब्ध मात्रा कम होने पर अपनाये जाने वाले उपाय
जिन खेतों में जिंक का न्यूनतम स्तर 0.60 पी.पी.एम. से कम पाया जाये तो वहां बुवाई से पूर्व जिंक का प्रयोग करें।
जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट
21 प्रतिशत जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट 6 किग्रा. प्रति बीघा की दर से प्रयोग करें।
जिंक मोनोहाइड्रेट
33 प्रतिशत जिंक मोनोहाइड्रेट 3.5 किग्रा. प्रति बीघा की दर से प्रयोग करें।
मध्यम स्तर की उपलब्धता
0.60 से 1.20 पी.पी.एम. पर जिंक सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट 3 किग्रा. प्रति बीघा अथवा जिंक मोनोहाइड्रेट 1.75 किग्रा. प्रति बीघा की दर से भूमि में मिला दें।
जिंक की कमी के लक्षण
मृदा में जिंक की कमी होने पर या खड़ी फसल में जिंक की कमी के लक्षण प्रकट होने पर पर्णीय छिड़काव करें।
मृदा परीक्षण के आधार पर जिन खेतों में जिंक की उपलब्ध मात्रा क्रांतिक स्तर (0.60 पी.पी.एम.) से कम पाया जाए तो जिंक सल्फेट के 0.5 प्रतिशत विलयन के 2 पर्णीय छिड़काव क्रमशः वानस्पतिक वृद्धि अवस्था तथा फली विकास अवस्था पर करने चाहिए।