उकठा (फ्यूजेरियम विल्ट)
चना फसल में रोग की पहचान एवं रोग प्रबन्धन
उकठा मृदा एवं बीज जनित रोग है। यह रोग फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम फारमा स्पेसीज साइसराई नामक कवक से फैलता है। रोगी पौधों में ऊपर की पत्तियाँ और टहनियां मुरझा कर सूख जाती हैं। धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखे भूसे की तरह मुरझा जाता है।
यदि रोगी पौधे की जड़ को बीच में से दो भागों में चीरा जाये तो बीच में सीधी लम्बी भूरे-काले रंग की धारी नजर आती है।
पत्तियों का मुरझाना
ऊपर की पत्तियाँ धीरे-धीरे मुरझाकर सूखने लगती हैं।
टहनियों का सूखना
रोग बढ़ने पर टहनियाँ भी मुरझाकर सूख जाती हैं और पूरा पौधा सूखे भूसे जैसा दिखाई देता है।
जड़ में भूरे-काले धब्बे
जड़ को बीच से काटने पर अंदर सीधी लम्बी भूरे-काले रंग की धारी दिखाई देती है।
मृदा एवं बीज जनित रोग
उकठा रोग रोधी/सहनशील किस्मों जैसे जीएनजी-1581, जीएनजी-1958, जीएनजी-2144, जीएनजी-2171 जैसी किस्मों को उगाना चाहिये।
गर्मी के मौसम में गहरी जुताई कर खेत खुला छोड़ देने से कवक के बीजाणु नष्ट हो जाते हैं।
जिन खेतों में यह रोग अधिक पाया गया है, वहां तीन वर्षों तक चने की खेती न करें।
बुवाई से पहले बीजों का उचित बीज उपचार करें।