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एस्कोकाइटा झुलसा

एस्कोकाइटा झुलसा

झुलसा रोग - चाँदनी या एस्कोकाइटा ब्लाईट

🌱 झुलसा रोग (चाँदनी या एस्कोकाइटा ब्लाईट)

फसल में फूल आने और फलियाँ लगने के समय अधिक प्रकोप करने वाला रोग

🔬 रोग की पहचान

यह रोग पौधों में एसकोकाइटा रैबी नामक कवक के संक्रमण से फैलता है। यह रोग उच्च आर्द्रता और न्यून तापमान की स्थिति में अधिक फैलता है। फसल में फूल आने और फलियाँ लगते समय इस रोग का प्रकोप होता है।

👁️ रोग के प्रमुख लक्षण

🍂 तना तने पर भूरे रंग के धब्बे बनते हैं।
🌿 पत्ते पत्तों पर भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं।
🫘 फलियाँ फलियों पर भी भूरे रंग के धब्बे बनते हैं।
⚠️ प्रकोप बढ़ने पर तने व डंठल टूटकर झुक जाते हैं।

🛡️ प्रबन्धन

  • संक्रमित फसल की कटाई के बाद खेत में संक्रमित पौधों के अवशेषों को एकत्र कर जला देना चाहिये।
  • फसल की बुवाई थोड़ा देर से नवम्बर माह के तृतीय सप्ताह तक करने से रोग कम लगता है।
  • रोगरोधी/सहनशील उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिये।
  • रोग के प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देते ही फसल पर क्लोरोथेलोनिल (75 डब्ल्यू. पी.) की एक ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
💧 छिड़काव की स्थिति:
मौसम में नमी व रूक-रूक कर वर्षा होने की स्थिति में इस रसायन का छिड़काव 10-10 दिन के अन्तराल पर तीन बार दोहरायें।
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