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फली छेदक

फली छेदक

चना फली छेदक - हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा

🌱 चना फली छेदक (हेलिकोवर्पा आर्मिजेरा)

चना फसल का सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं खतरनाक फली छेदक कीट

🐛 कीट की पहचान एवं नुकसान

चने की फसल पर लगने वाले कीटों में फलीछेदक सर्वाधिक महत्वपूर्ण व खतरनाक कीट है। अकेले इस कीट से उत्पादकता में 20-30 प्रतिशत की हानि हो जाती है। भीषण प्रकोप की स्थिति में नुकसान 70-80 प्रतिशत तक भी पहुँच सकता है। फूल व फली बनते समय इसके प्रकोप से अधिक हानि होती है।

🛡️ प्रबन्धन

  • फलीछेदक के प्रबन्धन के लिये निरन्तर निगरानी अति-आवश्यक है।
  • प्रति दस पौधों में एक सूंडी मिलने लगे तो तुरन्त फसल सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिये।
  • यौन आकर्षण जाल (सैक्स फेरामोन ट्रेप) का प्रयोग कीट को प्रकोप बढ़ने से पूर्व चेतावनी के रूप में किया जा सकता है।
  • जनवरी फरवरी माह में प्रति हैक्टेयर क्षेत्र को चार टुकड़ों में बांट कर हर हिस्से में एक फेरामेन ट्रेप स्थापित करना चाहिये।
  • यदि एक या अधिक फलीछेदक के पतंगे 2 से 3 दिन लगातार आने पर 5 से 8 दिन के बीच निम्न में से किसी एक रसायन का प्रथम छिड़काव किया जाना चाहिये।
  • अधिक प्रकोप होने पर कीटनाशक का छिड़काव 10-15 दिन के अन्तराल पर दोहरायें एवं एक ही कीटनाशक का दोबारा प्रयोग न करें।
⚠️ निगरानी संकेत: प्रति दस पौधों में एक सूंडी मिलने लगे तो फसल सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिये।

🧪 सुझाये गये रसायन एवं मात्रा

इन्डोक्साकार्ब 14.5 ए.सी.
1 मिली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
एसीफेट 75 एस.पी.
2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
इमामैक्लिन बेनजोयट 5 एस.जी.
0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
स्पाइनोसेड 45 एस.सी.
0.33 मिली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें
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